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mahabharat 7.17.46: संजय कहते हैं - हे राजन! तब राजा युधिष्ठिर ने अर्जुन को जाने की अनुमति देकर उसे हृदय से लगा लिया और बार-बार प्रेमपूर्वक देखकर आशीर्वाद दिया ॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 7.17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.17.46 
संजय उवाच
अनुज्ञातस्ततो राज्ञा परिष्वक्तश्च फाल्गुन:।
प्रेम्णा दृष्टश्च बहुधा ह्याशिषश्चास्य योजिता:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तब राजा युधिष्ठिर ने अर्जुन को जाने की अनुमति देकर उसे हृदय से लगा लिया और बार-बार प्रेमपूर्वक देखकर आशीर्वाद दिया ॥ 46॥
 
Sanjaya says - O King! Then King Yudhishthira gave Arjuna the permission to leave and embraced him. He looked at him lovingly again and again and blessed him. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)