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mahabharat 7.17.45: हे प्रभु! यदि सिंह-पुरुष सत्यजित् युद्धभूमि में मर जाए, तो आप सबके साथ रहते हुए भी युद्धभूमि में न रहें ॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 7.17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.17.45 
हते तु पुरुषव्याघ्रे रणे सत्यजिति प्रभो।
सर्वैरपि समेतैर्वा न स्थातव्यं कथंचन॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! यदि सिंह-पुरुष सत्यजित् युद्धभूमि में मर जाए, तो आप सबके साथ रहते हुए भी युद्धभूमि में न रहें ॥ 45॥
 
Lord! If the lion-man Satyajit dies on the battlefield, then even if you are with everyone, do not stay on the battlefield. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)