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mahabharat 7.17.44: अर्जुन बोले—हे राजन! यह पांचाल राजकुमार सत्यजित आज युद्धभूमि में आपकी रक्षा करेगा। जब तक वह जीवित रहेगा, आचार्य उसकी इच्छा पूरी नहीं कर सकेंगे।   |   mahabharat अध्याय 7.17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.17.44 
अर्जुन उवाच
अयं वै सत्यजिद् राजन्नद्य त्वां रक्षिता युधि।
ध्रियमाणे च पाञ्चाल्ये नाचार्य: काममाप्स्यति॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले—हे राजन! यह पांचाल राजकुमार सत्यजित आज युद्धभूमि में आपकी रक्षा करेगा। जब तक वह जीवित रहेगा, आचार्य उसकी इच्छा पूरी नहीं कर सकेंगे।
 
Arjun said—O King! This Panchala prince Satyajit will protect you on the battlefield today. As long as he is alive, the Acharya will not be able to fulfill his wish. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)