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mahabharat 7.17.41: हे महात्मन! मैं शत्रुओं की इस ललकार को सहन नहीं कर सकता। मैं आपसे सच्ची शपथ लेकर कहता हूँ कि आप इन शत्रुओं को युद्ध में मारा हुआ ही समझें।॥41॥   |   mahabharat अध्याय 7.17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.17.41 
नैतच्छक्नोमि संसोढुमाह्वानं पुरुषर्षभ।
सत्यं ते प्रतिजानामि हतान् विद्धि परान् युधि॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! मैं शत्रुओं की इस ललकार को सहन नहीं कर सकता। मैं आपसे सच्ची शपथ लेकर कहता हूँ कि आप इन शत्रुओं को युद्ध में मारा हुआ ही समझें।॥41॥
 
O great man! I cannot tolerate this challenge of the enemies. I tell you with true oath that you should consider these enemies as killed in the war.'॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)