Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.17.29-35: ‘यदि हम युद्ध में अर्जुन को मारे बिना लौट जाएँ अथवा उसके बाणों से घायल होकर भय के कारण युद्ध से विमुख हो जाएँ, तो हम उन मनुष्यों के समान पापमय लोकों को प्राप्त होंगे जो व्रत न करने वाले, ब्राह्मण की हत्या करने वाले, मद्यपान करने वाले, गुरुपत्नी का अनुगमन करने वाले, ब्राह्मण के धन का अपहरण करने वाले, राजा द्वारा दी गई जीविका को छीनने वाले, शरणागत का परित्याग करने वाले, भिखारी को मारने वाले, घर में आग लगाने वाले, गौहत्या करने वाले, दूसरों की निन्दा करने वाले, ब्राह्मणों से द्वेष करने वाले, कामवश रजस्वला होने पर भी अपनी स्त्री से सहवास न करने वाले, श्राद्ध के दिन सहवास करने वाले, अपनी जाति छिपाने वाले, उत्तराधिकार हड़पने वाले, व्रत तोड़ने वाले, नपुंसक से युद्ध करने वाले, नीच मनुष्यों की संगति करने वाले, ईश्वर और परलोक में विश्वास न करने वाले, अग्नि, माता और पिता की सेवा का त्याग करने वाले, फसलों को पैरों तले रौंदकर नष्ट करने वाले, सूर्य की ओर मुख करके मूत्र त्याग करने वाले तथा पाप से भरे हुए मनुष्य प्राप्त करते हैं।’ 29-35। | mahabharat अध्याय 7.17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये वै लोकाश्चाव्रतिनां ये चैव ब्रह्मघातिनाम्।
मद्यपस्य च ये लोका गुरुदाररतस्य च॥ २९॥
ब्रह्मस्वहारिणश्चैव राजपिण्डापहारिण:।
शरणागतं च त्यजतो याचमानं तथा घ्नत:॥ ३०॥
अगारदाहिनां चैव ये च गां निघ्नतामपि।
अपकारिणां च ये लोका ये च ब्रह्मद्विषामपि॥ ३१॥
स्वभार्यामृतुकालेषु मोहाद् वै नाभिगच्छताम्।
श्राद्धमैथुनिकानां च ये चाप्यात्मापहारिणाम्॥ ३२॥
न्यासापहारिणां ये च श्रुतं नाशयतां च ये।
क्लीबेन युध्यमानानां ये च नीचानुसारिणाम्॥ ३३॥
नास्तिकानां च ये लोका येऽग्निमातृपितृत्यजाम्।
(सस्यमाक्रमतां ये च प्रत्यादित्यं प्रमेहताम्।)
तानाप्नुयामहे लोकान् ये च पापकृतामपि॥ ३४॥
यद्यहत्वा वयं युद्धे निवर्तेम धनंजयम्।
तेन चाभ्यर्दितास्त्रासाद् भवेम हि पराङ्मुखा:॥ ३५॥
अनुवाद
‘यदि हम युद्ध में अर्जुन को मारे बिना लौट जाएँ अथवा उसके बाणों से घायल होकर भय के कारण युद्ध से विमुख हो जाएँ, तो हम उन मनुष्यों के समान पापमय लोकों को प्राप्त होंगे जो व्रत न करने वाले, ब्राह्मण की हत्या करने वाले, मद्यपान करने वाले, गुरुपत्नी का अनुगमन करने वाले, ब्राह्मण के धन का अपहरण करने वाले, राजा द्वारा दी गई जीविका को छीनने वाले, शरणागत का परित्याग करने वाले, भिखारी को मारने वाले, घर में आग लगाने वाले, गौहत्या करने वाले, दूसरों की निन्दा करने वाले, ब्राह्मणों से द्वेष करने वाले, कामवश रजस्वला होने पर भी अपनी स्त्री से सहवास न करने वाले, श्राद्ध के दिन सहवास करने वाले, अपनी जाति छिपाने वाले, उत्तराधिकार हड़पने वाले, व्रत तोड़ने वाले, नपुंसक से युद्ध करने वाले, नीच मनुष्यों की संगति करने वाले, ईश्वर और परलोक में विश्वास न करने वाले, अग्नि, माता और पिता की सेवा का त्याग करने वाले, फसलों को पैरों तले रौंदकर नष्ट करने वाले, सूर्य की ओर मुख करके मूत्र त्याग करने वाले तथा पाप से भरे हुए मनुष्य प्राप्त करते हैं।’ 29-35।
‘If we return without killing Arjuna in the war or if we are struck by his arrows and turn away from the war out of fear, then we will attain the same sinful worlds as those who do not observe fasts, kill a brahmin, drink alcohol, follow the wife of a Guru, kidnap the wealth of a Brahmin, snatch the livelihood given by the king, abandon a person who has taken refuge, kill a beggar, set fire to a house, slaughter a cow, talk ill of others, hate Brahmins, do not have intercourse with their wives even during their period due to lust, have sexual intercourse on the day of Shraadh, hide their caste, usurp the inheritance, break their vows, fight with an impotent person, keep company with mean men, do not believe in God and the afterlife, abandon the service of fire, mother and father, destroy the crops by trampling them under their feet, urinate facing the sun and are full of sins. Men get it. 29-35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥