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mahabharat 7.17.23: कवच और कुशा का वस्त्र धारण करके उन्होंने शरीर पर घी लगाया और मौरवी नामक एक विशेष घास का बना हुआ मेखला धारण किया। उन सभी वीर योद्धाओं ने पहले ही यज्ञ करके लाखों स्वर्ण मुद्राएँ दक्षिणा में बाँट दी थीं॥23॥   |   mahabharat अध्याय 7.17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.17.23 
ते च बद्धतनुत्राणा घृताक्ता: कुशचीरिण:।
मौर्वीमेखलिनो वीरा: सहस्रशतदक्षिणा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कवच और कुशा का वस्त्र धारण करके उन्होंने शरीर पर घी लगाया और मौरवी नामक एक विशेष घास का बना हुआ मेखला धारण किया। उन सभी वीर योद्धाओं ने पहले ही यज्ञ करके लाखों स्वर्ण मुद्राएँ दक्षिणा में बाँट दी थीं॥23॥
 
After putting on the armour and the kusha cloth, he applied ghee on his body and wore a belt made of a special grass called maurvi. All those brave warriors had already performed a yajna and distributed lakhs of gold coins as dakshina.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)