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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.17.22 
ततो ज्वलनमानर्च्य हुत्वा सर्वे पृथक् पृथक्।
जगृहु: कुशचीराणि चित्राणि कवचानि च॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सभी ने अलग-अलग अग्नि देवता की पूजा की, हवन किया और कुशा का वस्त्र और एक विचित्र कवच पहना।
 
All of them separately worshipped the god Agni and performed havans and wore kusha cloth and a strange armour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)