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mahabharat 7.17.13: उन नाना अपराधों को स्मरण करके हम क्रोध की अग्नि में जलते रहते हैं और रात को सो नहीं पाते॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.17.13 
ते वयं स्मरमाणास्तान् विनिकारान् पृथग्विधान्।
क्रोधाग्निना दह्यमाना न शेमहि सदा निशि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन नाना अपराधों को स्मरण करके हम क्रोध की अग्नि में जलते रहते हैं और रात को सो नहीं पाते॥13॥
 
Remembering those various offences, we burn in the fire of anger and are unable to sleep at night.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)