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mahabharat 7.169.48-49: हे भारतश्रेष्ठ! उस युद्ध में प्रेमवश पिता ने पुत्र को और पुत्र ने पिता को मार डाला। मित्र ने मित्र को मार डाला। चाचा ने भतीजे को और भतीजे ने मामा को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  7.169.48-49 
अवधीत् समरे पुत्रं पिता भरतसत्तम॥ ४८॥
पुत्रश्च पितरं मोहात् सखायं च सखा तथा।
स्वस्रीयं मातुलश्चापि स्वस्रीयश्चापि मातुलम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! उस युद्ध में प्रेमवश पिता ने पुत्र को और पुत्र ने पिता को मार डाला। मित्र ने मित्र को मार डाला। चाचा ने भतीजे को और भतीजे ने मामा को मार डाला।
 
Bharatshrestha! In that battle, out of love, the father killed his son and the son killed the father. Friend took friend's life. Uncle killed his nephew and nephew killed his maternal uncle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)