Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.169.47-48h: भरत! उस रात्रि में जब वह भयंकर और कोलाहलपूर्ण युद्ध चल रहा था, योद्धा कुछ भी समझ नहीं पा रहे थे। वे अपने बारे में भी नहीं जान पा रहे थे कि 'मैं अमुक हूँ'। 47 1/2 | mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मिन् कोलाहले युद्धे वर्तमाने निशामुखे॥ ४७॥
न किंचिद् विदुरात्मानमयमस्मीति भारत।
अनुवाद
भरत! उस रात्रि में जब वह भयंकर और कोलाहलपूर्ण युद्ध चल रहा था, योद्धा कुछ भी समझ नहीं पा रहे थे। वे अपने बारे में भी नहीं जान पा रहे थे कि 'मैं अमुक हूँ'। 47 1/2
Bharat! During that night when that terrible and noisy battle was going on, the warriors could not understand anything. They could not even know about themselves that 'I am so and so'. 47 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥