श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.169.46-47h 
अस्त्राणां कवचानां च मणीनां च महात्मनाम्॥ ४६॥
अन्तर्दधु: प्रभा: सर्वा दीपैस्तैरवभासिता:।
 
 
अनुवाद
महामनस्वी योद्धाओं के अस्त्र-शस्त्र, कवच और रत्नों की सम्पूर्ण चमक उन दीपों के प्रकाश से फीकी पड़ गयी।
 
The entire brilliance of the weapons, armour and gems of the great-minded warriors was obscured by the light of those lamps.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)