Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.169.44-45h: जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश से संसार में फैला हुआ अंधकार नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार यहाँ-वहाँ जलती हुई मशालों से वहाँ का भयंकर अंधकार नष्ट हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  7.169.44-45h 
आदित्येन यथा व्याप्तं तमो लोके प्रणश्यति॥ ४४॥
तथा नष्टं तमो घोरं दीपैर्दीप्तैरितस्तत:।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश से संसार में फैला हुआ अंधकार नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार यहाँ-वहाँ जलती हुई मशालों से वहाँ का भयंकर अंधकार नष्ट हो गया।
 
Just as the darkness spread across the world is destroyed by the light of the Sun, similarly the terrible darkness there was destroyed by the torches burning here and there. 44 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)