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mahabharat 7.169.41-42h: उस रात सैनिकों के दौड़ने, भागने और फिर वापस लौटने की आवाजें बहुत तेज सुनाई दे रही थीं। 41 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.169.41-42h 
धावतां द्रवतां चैव पुनरावर्ततामपि॥ ४१॥
बभूव तत्र सैन्यानां शब्द: सुविपुलो निशि।
 
 
अनुवाद
उस रात सैनिकों के दौड़ने, भागने और फिर वापस लौटने की आवाजें बहुत तेज सुनाई दे रही थीं। 41 1/2
 
During that night a great uproar could be heard from the soldiers running, fleeing and then returning. 41 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)