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mahabharat 7.169.39-40h: हे भारतपुत्र! वे विशाल हाथी मदमस्त होकर मदमस्त होकर दूसरे हाथियों से अचानक भिड़ जाते और एक-दूसरे को वश में करने का प्रयत्न करते।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  7.169.39-40h 
तथा गजान् प्रभिन्नांश्च सम्प्रभिन्ना महागजा:॥ ३९॥
तस्मिन्नेव पदे यत्ता निगृह्णन्ति स्म भारत।
 
 
अनुवाद
हे भारतपुत्र! वे विशाल हाथी मदमस्त होकर मदमस्त होकर दूसरे हाथियों से अचानक भिड़ जाते और एक-दूसरे को वश में करने का प्रयत्न करते।
 
O son of Bharat! The huge elephants, flowing with intoxication, would suddenly clash with the other elephants, flowing with intoxication, and would try hard to control each other. 39 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)