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mahabharat 7.169.38-39h: महाराज! जैसे कौवे दौड़कर टिड्डियों को पकड़ लेते हैं, वैसे ही बहुत से रथियों ने रथों पर बैठकर बड़े वेग से आक्रमण करके शत्रु सैनिकों को पकड़ लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.169.38-39h 
रथिनो रथमारुह्य प्रद्रुता वेगवत्तरम्॥ ३८॥
अगृह्णन् बहवो राजन् शलभान् वायसा इव।
 
 
अनुवाद
महाराज! जैसे कौवे दौड़कर टिड्डियों को पकड़ लेते हैं, वैसे ही बहुत से रथियों ने रथों पर बैठकर बड़े वेग से आक्रमण करके शत्रु सैनिकों को पकड़ लिया।
 
King! Just as crows catch locusts by running, similarly, a large number of charioteers sitting on chariots and attacking with great speed caught the enemy soldiers. 38 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)