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mahabharat 7.169.37-38h: महाराज! दौड़ते हुए पैदल सैनिकों के पैरों की ध्वनि से पृथ्वी भयभीत असहाय स्त्री की भाँति काँपने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.169.37-38h 
पत्तीनां द्रवतां चैव पादशब्देन मेदिनी॥ ३७॥
अकम्पत महाराज भयत्रस्तेव चाङ्गना।
 
 
अनुवाद
महाराज! दौड़ते हुए पैदल सैनिकों के पैरों की ध्वनि से पृथ्वी भयभीत असहाय स्त्री की भाँति काँपने लगी।
 
Maharaj! With the sound of the feet of the running infantry the earth began to tremble like a frightened helpless woman. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)