vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध
»
श्लोक 37-38h
श्लोक
7.169.37-38h
पत्तीनां द्रवतां चैव पादशब्देन मेदिनी॥ ३७॥
अकम्पत महाराज भयत्रस्तेव चाङ्गना।
अनुवाद
महाराज! दौड़ते हुए पैदल सैनिकों के पैरों की ध्वनि से पृथ्वी भयभीत असहाय स्त्री की भाँति काँपने लगी।
Maharaj! With the sound of the feet of the running infantry the earth began to tremble like a frightened helpless woman. 37 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×