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mahabharat 7.169.35-36h: हे राजन! युद्धभूमि में एक-दूसरे पर आक्रमण करने वाले रथों की भयानक गड़गड़ाहट बादलों की गर्जना के समान प्रतीत हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.169.35-36h 
रथानां च रणे राजन्नन्योन्यमभिधावताम्॥ ३५॥
बभूव तुमुल: शब्दो मेघानां गर्जतामिव।
 
 
अनुवाद
हे राजन! युद्धभूमि में एक-दूसरे पर आक्रमण करने वाले रथों की भयानक गड़गड़ाहट बादलों की गर्जना के समान प्रतीत हो रही थी।
 
O King! The terrifying sound of the rattling of the chariots attacking each other on the battlefield seemed like the roar of the clouds. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)