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mahabharat 7.169.33-34h: राजा द्रुपद के उस महारथी पुत्र को युद्ध से विमुख होते देख, पांचाल और सोमकों ने उसे चारों ओर से घेर लिया और अपने मध्य में ले लिया ॥33 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.169.33-34h 
विमुखं तु रणे दृष्ट्वा याज्ञसेनिं महारथम्॥ ३३॥
पञ्चाला: सोमकाश्चैव परिवव्रु: समन्तत:।
 
 
अनुवाद
राजा द्रुपद के उस महारथी पुत्र को युद्ध से विमुख होते देख, पांचाल और सोमकों ने उसे चारों ओर से घेर लिया और अपने मध्य में ले लिया ॥33 1/2॥
 
Seeing that mighty car-warrior son of King Drupada turning away from the battle, the Panchalas and the Somakas surrounded him from all sides and took him into their midst. ॥ 33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)