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mahabharat 7.169.32-33h: हे भरतपुत्र! युद्धभूमि में शिखण्डी को दुर्बल देखकर शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने उस पर अनेक बाणों से आक्रमण किया, मानो वे उसे मार डालना चाहते हों।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.169.32-33h 
सीदन्तं चैनमालोक्य कृप: शारद्वतो युधि॥ ३२॥
आजघ्ने बहुभिर्बाणैर्जिघांसन्निव भारत।
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! युद्धभूमि में शिखण्डी को दुर्बल देखकर शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने उस पर अनेक बाणों से आक्रमण किया, मानो वे उसे मार डालना चाहते हों।
 
O son of Bharata! Seeing Shikhandi weakened on the battlefield, Sharadvana's son Kripacharya attacked him with many arrows, as if he wanted to kill him. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)