Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.169.30-31h: महाराज! तब रथियों में श्रेष्ठ कृपाचार्य ने दूसरा धनुष हाथ में लेकर शिखण्डी को तीखे बाणों से आच्छादित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.169.30-31h 
अथान्यद् धनुरादाय गौतमो रथिनां वर:॥ ३०॥
प्राच्छादयच्छितैर्बाणैर्महाराज शिखण्डिनम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब रथियों में श्रेष्ठ कृपाचार्य ने दूसरा धनुष हाथ में लेकर शिखण्डी को तीखे बाणों से आच्छादित कर दिया।
 
Maharaj! Then Kripacharya, the best among charioteers, took another bow in his hand and covered Shikhandi with sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)