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mahabharat 7.169.18-19: तब कुन्ती के पुत्र और उनके सेवक बड़े जोर से गर्जना करने लगे। इस प्रकार युद्धस्थल में शत्रुओं को परास्त करके शत्रुओं को पीड़ा देने वाले नकुल ने क्रोध में भरकर अपने सारथि से कहा - 'सूत! मुझे द्रोणाचार्य की सेना में ले चलो।'   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  7.169.18-19 
तत: संचुक्रुशु: पार्था ये च तेषां पदानुगा:॥ १८॥
निर्जित्य च रणे शत्रुं नकुल: शत्रुतापन:।
अब्रवीत् सारथिं क्रुद्धो द्रोणानीकाय मां वह॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तब कुन्ती के पुत्र और उनके सेवक बड़े जोर से गर्जना करने लगे। इस प्रकार युद्धस्थल में शत्रुओं को परास्त करके शत्रुओं को पीड़ा देने वाले नकुल ने क्रोध में भरकर अपने सारथि से कहा - 'सूत! मुझे द्रोणाचार्य की सेना में ले चलो।'
 
Then Kunti's sons and their servants started roaring loudly. Having defeated the enemy in this way on the battlefield, Nakula, the tormentor of enemies, filled with anger, said to his charioteer - 'Sut! Take me to Dronacharya's army'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)