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mahabharat 7.169.16-17h: महाराज! उस बाण से बुरी तरह घायल होकर शकुनि रथ के पिछले भाग में दोनों भुजाओं से ध्वजदण्ड पकड़े हुए बैठ गया, जैसे कोई कामातुर पुरुष स्त्री का आलिंगन करता है।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.169.16-17h 
सोऽतिविद्धो महाराज रथोपस्थ उपाविशत्॥ १६॥
ध्वजयष्टिं परिक्लिश्य कामुक: कामिनीं यथा।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस बाण से बुरी तरह घायल होकर शकुनि रथ के पिछले भाग में दोनों भुजाओं से ध्वजदण्ड पकड़े हुए बैठ गया, जैसे कोई कामातुर पुरुष स्त्री का आलिंगन करता है।
 
Maharaj! Shakuni, badly wounded by that arrow, sat in the rear part of the chariot holding the flag pole with both his arms, just as a lustful man embraces a woman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)