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mahabharat 7.169.11: राजन! अपने परम शत्रु और अभिमानी शत्रु को ऐसी दशा में पड़ा देखकर शकुनि वर्षा ऋतु में मेघ के समान जोर से गर्जना करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.169.11 
अत्यन्तवैरिणं दृप्तं दृष्ट्वा शत्रुं तथागतम्।
ननाद शकुनी राजंस्तपान्ते जलदो यथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजन! अपने परम शत्रु और अभिमानी शत्रु को ऐसी दशा में पड़ा देखकर शकुनि वर्षा ऋतु में मेघ के समान जोर से गर्जना करने लगा।
 
King! Seeing his most hostile and proud enemy lying in such a condition, Shakuni began to roar loudly like a cloud during the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)