श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 168:  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.168.5 
सोऽपेतवर्मा पुत्रस्ते विरराज भृशं नृप।
उत्सृज्य काले राजेन्द्र निर्मोकमिव पन्नग:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! राजन! कवच कट जाने पर आपका पुत्र चित्रसेन समय आने पर केंचुल उतारने वाले सर्प के समान अत्यंत सुन्दर दिखाई देने लगा।॥5॥
 
O lord of men! King! After his armour was cut, your son Chitrasena looked very beautiful like a snake that sheds its skin at the right time. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)