vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 168:
»
श्लोक 34
श्लोक
7.168.34
प्रतिविन्ध्यमथ क्रुद्धं प्रदहन्तं रणे रिपून्।
दु:शासनस्तव सुत: प्रत्यगच्छन्महारथ:॥ ३४॥
अनुवाद
उधर, क्रोध में भरे हुए प्रतिविन्ध्य युद्धस्थल में शत्रुओं को जला रहे थे। आपका महाबली पुत्र दु:शासन उनका सामना करने के लिए आ पहुँचा। 34.
On the other side, Prativindhya, filled with rage, was burning the enemies in the battlefield. Your mighty son Dushasan arrived to face him. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×