श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 168:  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.168.28 
तथाङ्गदैर्निपतितैर्व्यराजत वसुंधरा।
प्रावृट्काले महाराज विद्युद्भिरिव तोयद:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! वहाँ की भूमि वीर योद्धाओं के चमकते हुए बाजूबंदों से ऐसी शोभायमान हो रही थी, जैसे वर्षा ऋतु में बादल बिजली की चमक से प्रकाशित हो जाते हैं।
 
O King! The ground there was looking as beautiful with the shining armlets of the fallen warriors as the clouds are illuminated with lightning during the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)