श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 168:  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.168.27 
प्रदीपैर्हि परित्यक्तैर्ज्वलद्भिस्तै: समन्तत:।
व्यराजत मही राजन् वीताभ्रा द्यौरिव ग्रहै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! भागते हुए सैनिकों द्वारा फेंकी गई मशालें हर जगह जल रही थीं। युद्धभूमि तारों और ग्रहों से भरे बादल रहित आकाश की तरह सुंदर लग रही थी।
 
King! The torches thrown by the fleeing soldiers were burning everywhere. The battlefield was looking beautiful like a cloudless sky filled with stars and planets.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)