श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 168:  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.168.17 
रुक्मपुङ्खै: प्रसन्नाग्रै: शरैश्छिन्नतनुच्छदौ।
रुधिरौघपरिक्लिन्नौ व्यभ्राजेतां महामृधे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस महासमर में सुवर्णमय पंखयुक्त और तीक्ष्ण धारवाले बाणों से दोनों के कवच कट गए और दोनों रक्त से भीगे हुए अद्भुत रूप में दिख रहे थे॥17॥
 
In that great battle the armour of both was cut by arrows of golden feathers and sharp edges and both looked wonderfully soaked in blood.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)