श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 168:  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.168.14 
यज्ञसेनस्तु समरे कर्णपुत्रं महारथम्।
षष्टॺा शराणां विव्याध बाह्वोरुरसि चानघ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! युद्धस्थल में राजा यज्ञसेन (द्रुपद) ने महायोद्धा कर्णपुत्र वृषसेन की छाती और भुजाओं में साठ बाण मारे।
 
O sinless king! In the battle-field, King Yajnasena (Drupada) shot sixty arrows into the chest and arms of the great warrior Vrishasena, son of Karna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)