शतानीकके द्वारा चित्रसेनकी और वृषसेनके द्वारा द्रुपदकी पराजय तथा प्रतिविन्ध्य एवं दु:शासनका युद्ध
संजय उवाच
शतानीकं शरैस्तूर्णं निर्दहन्तं चमूं तव।
चित्रसेनस्तव सुतो वारयामास भारत॥ १॥
अनुवाद
संजय कहते हैं- भरत! नकुल का पुत्र शतानीक एक ओर से आपकी सेना को अपनी अग्नि से जलाता हुआ आ रहा था। आपके पुत्र चित्रसेन ने उसे रोक लिया।
Sanjaya says- Bharata! Nakul's son Satanik was coming from one side, burning your army with his saragni (fire). Your son Chitrasena stopped him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)