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mahabharat 7.167.6: रथविहीन होकर सहदेव ने अपनी ढाल और तलवार उठा ली, किन्तु कर्ण ने मुस्कुराते हुए उस पर बाण चलाकर उसकी तलवार को टुकड़े-टुकड़े कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.167.6 
विरथ: सहदेवस्तु खड्गं चर्म समाददे।
तदप्यस्य शरै: कर्णो व्यधमत् प्रहसन्निव॥ ६॥
 
 
अनुवाद
रथविहीन होकर सहदेव ने अपनी ढाल और तलवार उठा ली, किन्तु कर्ण ने मुस्कुराते हुए उस पर बाण चलाकर उसकी तलवार को टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
Being left without a chariot, Sahadeva took up his shield and sword, but Karna smilingly shot an arrow at him and broke that sword into pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)