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श्लोक 7.167.50  |
तेषु तूत्साद्यमानेषु फाल्गुनेन महात्मना।
सम्प्राद्रवद् बलं सर्वं पुत्राणां ते विशाम्पते॥ ५०॥ |
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| अनुवाद |
| हे प्रजानाथ! जब महाबली अर्जुन इस प्रकार उनका वध करने लगे, तब आपके पुत्रों की सारी सेना भाग गई। |
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| O Prajanath! When the great Arjuna started killing them in this manner, then the entire army of your sons fled. 50. |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे अलम्बुषपराभवे सप्तषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके अवसरपर अलम्बुषका पराजयविषयक एक सौ सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६७॥
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