Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.167.47: भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात् कुन्तीकुमार अर्जुन ने उस राक्षसराज को चार तीखे बाणों से बींध डाला। उन बाणों से घायल होकर अलम्बुष भयभीत होकर भाग गया॥47॥ | mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथैनं निशितैर्बाणैश्चतुर्भिर्भरतर्षभ।
पार्थोऽविध्यद् राक्षसेन्द्रं स विद्ध: प्राद्रवद् भयात्॥ ४७॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात् कुन्तीकुमार अर्जुन ने उस राक्षसराज को चार तीखे बाणों से बींध डाला। उन बाणों से घायल होकर अलम्बुष भयभीत होकर भाग गया॥47॥
Bharatshrestha! After that Kuntikumar Arjun pierced that demon king with four sharp arrows. After being hit by those arrows, Alambush ran away in fear. 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥