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mahabharat 7.167.40-41h: उसके ध्वज पर विचित्र पंखों और बड़ी-बड़ी आँखों वाला एक भयंकर गिद्धराज अपनी ही वाणी में बोल रहा था। ऊँचे दण्ड वाले उस चमकते हुए ध्वज के सामने वह राक्षस कटे हुए कोयले के पहाड़ के समान अत्यंत सुन्दर लग रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  7.167.40-41h 
रौद्रेण चित्रपक्षेण विवृताक्षेण कूजता।
ध्वजेनोच्छ्रितदण्डेन गृध्रराजेन राजता॥ ४०॥
स बभौ राक्षसो राजन् भिन्नाञ्जनचयोपम:।
 
 
अनुवाद
उसके ध्वज पर विचित्र पंखों और बड़ी-बड़ी आँखों वाला एक भयंकर गिद्धराज अपनी ही वाणी में बोल रहा था। ऊँचे दण्ड वाले उस चमकते हुए ध्वज के सामने वह राक्षस कटे हुए कोयले के पहाड़ के समान अत्यंत सुन्दर लग रहा था।
 
On his flag, a fearsome vulture king with strange wings and wide eyes spoke in his own voice. That demon looked very beautiful like a mountain of cut coal in front of that shining flag with a tall staff. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)