श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  7.167.38-39 
तुरङ्गममुखैर्युक्तं पिशाचैर्घोरदर्शनै:॥ ३८॥
लोहितार्द्रपताकं तं रक्तमाल्यविभूषितम्।
कार्ष्णायसमयं घोरमृक्षचर्मसमावृतम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उसके रथ में घोड़ों के समान मुख वाले भयानक राक्षस जुते हुए थे। उस पर लाल रंग का ध्वज लहरा रहा था। वह रथ लाल फूलों की मालाओं से सुशोभित था। वह भयानक रथ काले लोहे का बना था और उस पर भालू की खाल मढ़ी हुई थी। 38-39.
 
His chariot was yoked by terrifying demons with faces like those of horses. A red coloured flag was fluttering on it. That chariot was decorated with garlands of red flowers. That terrifying chariot was made of black iron and bear skin was covered on it. 38-39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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