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mahabharat 7.167.32: तब क्रोध से आँखें फाड़कर तथा अपना पराक्रम दिखाते हुए विराट ने शीघ्रतापूर्वक मद्रराज के रथ को अपने बाणों से ढक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.167.32 
ततो विस्फार्य नयने क्रोधाद् द्विगुणविक्रम:।
मद्रराजरथं तूर्णं छादयामास पत्रिभि:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध से आँखें फाड़कर तथा अपना पराक्रम दिखाते हुए विराट ने शीघ्रतापूर्वक मद्रराज के रथ को अपने बाणों से ढक दिया।
 
Then, with his eyes wide open in anger and displaying his might, Virata quickly covered the Madra king's chariot with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)