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mahabharat 7.167.31: वीर शतानीक के मारे जाने पर रथियों में श्रेष्ठ विराट तुरंत ही ध्वजाओं की माला से सुसज्जित उसी रथ पर सवार हो गये।   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.167.31 
तस्मिंस्तु निहते वीरे विराटो रथसत्तम:।
आरुरोह रथं तूर्णं तमेव ध्वजमालिनम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वीर शतानीक के मारे जाने पर रथियों में श्रेष्ठ विराट तुरंत ही ध्वजाओं की माला से सुसज्जित उसी रथ पर सवार हो गये।
 
After the heroic Shatanik was killed, Virata, the best among charioteers, immediately mounted the same chariot decorated with a garland of flags.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)