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mahabharat 7.167.20: यद्यपि उस समय सहदेव मारे जाने योग्य अवस्था को पहुँच गया था, तथापि कुन्ती को दिए गए वचन को स्मरण करके शत्रुसूदन सत्यप्रतिज्ञ और महाप्रतापी कर्ण ने उसे युद्ध में नहीं मारा ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.167.20 
वधं प्राप्तं तु माद्रेयं नावधीत् समरेऽरिहा।
कुन्त्या: स्मृत्वा वचो राजन् सत्यसंधो महायशा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि उस समय सहदेव मारे जाने योग्य अवस्था को पहुँच गया था, तथापि कुन्ती को दिए गए वचन को स्मरण करके शत्रुसूदन सत्यप्रतिज्ञ और महाप्रतापी कर्ण ने उसे युद्ध में नहीं मारा ॥20॥
 
Although at that time Sahadeva had reached a state capable of being killed, yet remembering the promise given to Kunti, Shatrusudan Satyapratigya and the great-illustrious Karna did not kill him in the battle. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)