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mahabharat 7.167.19: सहदेव से ऐसा कहकर रथियों में श्रेष्ठ कर्ण अपने रथ पर सवार होकर बड़े वेग से पांचालों और पाण्डवों की ओर चल पड़ा, मानो वह पांचालों और पाण्डवों की सेनाओं को जला रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.167.19 
एवमुक्त्वा तु तं कर्णो रथेन रथिनां वर:।
प्रायात् पाञ्चालपाण्डूनां सैन्यानि प्रदहन्निव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सहदेव से ऐसा कहकर रथियों में श्रेष्ठ कर्ण अपने रथ पर सवार होकर बड़े वेग से पांचालों और पाण्डवों की ओर चल पड़ा, मानो वह पांचालों और पाण्डवों की सेनाओं को जला रहा हो।
 
Having said this to Sahadeva, Karna, the best of charioteers, proceeded towards the Panchalas and the Pandavas in his chariot with great speed, as if he was burning the armies of the Panchalas and the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)