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mahabharat 7.167.17-18: तत्पश्चात् कर्ण ने अपने धनुष की नोक से उसे पीड़ा पहुँचाते हुए पुनः कहा, 'माद्रीपुत्र! अर्जुन युद्धभूमि में कौरवों के साथ युद्ध कर रहे हैं। तुम चाहो तो उनके पास जा सकते हो या घर लौट सकते हो।'   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  7.167.17-18 
अथैनं धनुषोऽग्रेण तुदन् भूयोऽब्रवीद् वच:॥ १७॥
एषोऽर्जुनो रणे तूर्णं युध्यते कुरुभि: सह।
तत्र गच्छस्व माद्रेय गृहं वा यदि मन्यसे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कर्ण ने अपने धनुष की नोक से उसे पीड़ा पहुँचाते हुए पुनः कहा, 'माद्रीपुत्र! अर्जुन युद्धभूमि में कौरवों के साथ युद्ध कर रहे हैं। तुम चाहो तो उनके पास जा सकते हो या घर लौट सकते हो।'
 
Thereafter, Karna, while tormenting him with the tip of his bow, again said, 'Son of Madri! Arjuna is fighting with the Kauravas in the battlefield. You may go to them or return home if you wish.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)