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mahabharat 7.167.14-15h: तत्पश्चात् माद्रीपुत्र सहदेव ने अपने को अस्त्र-शस्त्र से रहित समझकर कर्ण के बाणों से बाधित होकर युद्धभूमि छोड़ दी।   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  7.167.14-15h 
स निरायुधमात्मानं ज्ञात्वा माद्रवतीसुत:॥ १४॥
वार्यमाणस्तु विशिखै: सहदेवो रणं जहौ।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् माद्रीपुत्र सहदेव ने अपने को अस्त्र-शस्त्र से रहित समझकर कर्ण के बाणों से बाधित होकर युद्धभूमि छोड़ दी।
 
Thereafter, Sahadeva, the son of Madri, thinking himself devoid of weapons, abandoned the battlefield, obstructed by Karna's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)