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mahabharat 7.167.11-12h: वह रथ का पहिया, जो उठे हुए कालचक्र के समान सहसा उसके ऊपर गिर रहा था, सूतनंदन कर्ण ने हजारों बाणों से काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  7.167.11-12h 
तदापतद् वै सहसा कालचक्रमिवोद्यतम्॥ ११॥
शरैरनेकसाहस्रैराच्छिनत् सूतनन्दन:।
 
 
अनुवाद
वह रथ का पहिया, जो उठे हुए कालचक्र के समान सहसा उसके ऊपर गिर रहा था, सूतनंदन कर्ण ने हजारों बाणों से काट डाला।
 
That chariot wheel which was suddenly falling upon him like a raised time wheel was cut down by Sutanandan Karna with thousands of arrows. 11 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)