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mahabharat 7.167.10-11h: महाराज! तब सहदेव उस उत्तम रथ से शीघ्रतापूर्वक कूद पड़े और युद्धभूमि में अपने सामने खड़े अधिरथपुत्र कर्ण को देखकर उन्होंने रथ का एक पहिया निकालकर उसे उनके ऊपर चढ़ा दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 167: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.167.10-11h 
ससम्भ्रमं ततस्तूर्णमवप्लुत्य रथोत्तमात्।
सहदेवो महाराज दृष्ट्वा कर्णं व्यवस्थितम्॥ १०॥
रथचक्रं प्रगृह्याजौ मुमोचाधिरथिं प्रति।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब सहदेव उस उत्तम रथ से शीघ्रतापूर्वक कूद पड़े और युद्धभूमि में अपने सामने खड़े अधिरथपुत्र कर्ण को देखकर उन्होंने रथ का एक पहिया निकालकर उसे उनके ऊपर चढ़ा दिया।
 
Maharaj! Then Sahadeva quickly jumped from that excellent chariot and seeing Adhiratha's son Karna standing in front of him on the battlefield, he took one of the wheels of the chariot and drove it over him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)