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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.166.8 
अथैनं छिन्नधन्वानं नवभिर्निशितै: शरै:।
विव्याध हृदये तूर्णं तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
धनुष कटते ही सात्यकि ने तुरंत उसकी छाती में नौ तीखे बाण मारे और कहा, 'दृढ़ रहो, दृढ़ रहो।'
 
When the bow was cut, Satyaki immediately shot nine sharp arrows into his chest and said, 'Stand firm, stand firm.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)