Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.166.53-54: जब धनुष इस प्रकार बार-बार कट रहा था, तब भीमसेन ने एक सुन्दर, पूर्णतया लोहे का बना हुआ भाला युद्धभूमि में फेंका, जो मृत्यु की सगी बहन के समान दिखाई देता था। वह अग्नि की ज्वाला के समान चमक रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 53-54
 
 
श्लोक  7.166.53-54 
स तथा भिद्यमानेषु कार्मुकेषु पुन: पुन:॥ ५३॥
शक्तिं चिक्षेप समरे सर्वपारशवीं शुभाम्।
मृत्योरिव स्वसारं हि दीप्तां वह्निशिखामिव॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
जब धनुष इस प्रकार बार-बार कट रहा था, तब भीमसेन ने एक सुन्दर, पूर्णतया लोहे का बना हुआ भाला युद्धभूमि में फेंका, जो मृत्यु की सगी बहन के समान दिखाई देता था। वह अग्नि की ज्वाला के समान चमक रहा था।
 
When the bow was being cut repeatedly in this manner, Bhimasena threw a beautiful spear made entirely of iron on the battlefield, which looked like the real sister of death. It was glowing like a flame of fire. 53-54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)