श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 51-53h
 
 
श्लोक  7.166.51-53h 
तदप्यस्य धनु: क्षिप्रं चिच्छेद लघुहस्तवत्॥ ५१॥
द्वितीयं च तृतीयं च चतुर्थं पञ्चमं तथा।
आत्तमात्तं महाराज भीमस्य धनुराच्छिनत्॥ ५२॥
तव पुत्रो महाराज जितकाशी मदोत्कट:।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कुशल योद्धा की भाँति शीघ्रतापूर्वक भीमसेन का वह धनुष काट डाला। महाराज! आपके मदोन्मत्त पुत्र ने विजय से प्रसन्न होकर भीमसेन के दूसरे, तीसरे, चौथे और पाँचवें धनुष को भी काट डाला।
 
Duryodhana, like a skilled warrior, swiftly cut off that bow of Bhimasena. Maharaj! Your intoxicated son, rejoicing in victory, cut off the second, third, fourth and fifth bows held by Bhimasena. 51-52 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)