श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  7.166.47-48h 
ततो दुर्योधन: क्रुद्धो धनुरन्यन्महत्तरम्।
गृहीत्वा भरतश्रेष्ठो भीमसेनं शितै: शरै:॥ ४७॥
अपीडयद् रणमुखे पश्यतां सर्वधन्विनाम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भरतश्रेष्ठ दुर्योधन ने क्रोधित होकर दूसरा विशाल धनुष हाथ में लिया और युद्धस्थल पर स्थित समस्त धनुर्धरों के सामने ही तीखे बाणों द्वारा भीमसेन को पीड़ा पहुँचाने लगा। 47 1/2॥
 
After that, Duryodhana, the best of Bharat, got angry and took another huge bow in his hand and started tormenting Bhimasena with sharp arrows in front of all the archers at the front of the battle. 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)