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mahabharat 7.166.31-32: राक्षस के छोड़े हुए उन विशाल बाणों से घायल होकर महाबली अश्वत्थामा रणभूमि में आँधी से हिले हुए वृक्ष के समान काँपने लगा और ध्वजदण्ड का सहारा लेकर मूर्छित होकर गिर पड़ा ॥31-32॥   |   mahabharat अध्याय 7.166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  7.166.31-32 
स तैरभ्यायतैर्विद्धो राक्षसेन महाबल:॥ ३१॥
चचाल समरे द्रौणिर्वातनुन्न इव द्रुम:।
स मोहमनुसम्प्राप्तो ध्वजयष्टिं समाश्रित:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राक्षस के छोड़े हुए उन विशाल बाणों से घायल होकर महाबली अश्वत्थामा रणभूमि में आँधी से हिले हुए वृक्ष के समान काँपने लगा और ध्वजदण्ड का सहारा लेकर मूर्छित होकर गिर पड़ा ॥31-32॥
 
Wounded by those huge arrows shot by the demon, the mighty Ashwatthama began to tremble in the battlefield like a tree shaken by a storm. He fell unconscious, taking support of the flagstaff. ॥31-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)