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mahabharat 7.166.22-24h: तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए भीमसेन के बलवान पुत्र घटोत्कच ने वज्र और बिजली के समान चमकने वाले भयंकर बाणों द्वारा अश्वत्थामा को नष्ट कर दिया और उस पर सब ओर से क्षुप्र, अर्धचन्द्र, नाराच, शिलिमुख, वराहकर्ण, नालिका और विकर्ण आदि अस्त्रों की वर्षा करने लगा। 22-23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 22-24h
 
 
श्लोक  7.166.22-24h 
तत: क्रोधसमाविष्टो भैमसेनि: प्रतापवान्॥ २२॥
शरैरवचकर्तोग्रैर्द्रौणिं वज्राशनिप्रभै:।
क्षुरप्रैरर्धचन्द्रैश्च नाराचै: सशिलीमुखै:॥ २३॥
वराहकर्णैर्नालीकैर्विकर्णैश्चाभ्यवीवृषत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए भीमसेन के बलवान पुत्र घटोत्कच ने वज्र और बिजली के समान चमकने वाले भयंकर बाणों द्वारा अश्वत्थामा को नष्ट कर दिया और उस पर सब ओर से क्षुप्र, अर्धचन्द्र, नाराच, शिलिमुख, वराहकर्ण, नालिका और विकर्ण आदि अस्त्रों की वर्षा करने लगा। 22-23 1/2॥
 
After that, Ghatotkacha, the mighty son of Bhimsen, filled with anger, destroyed Ashwatthama with fierce arrows shining like thunderbolt and lightning and started raining on him weapons like Kshupra, Ardhachandra, Naarach, Shilimukh, Varahkarna, Naalika and Vikarna etc. from all sides. 22-23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)