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mahabharat 7.166.21-22h: महाराज! अश्वत्थामा के बाणों से बिंधकर वह राक्षस काँटों से भरे साही के समान शोभा पा रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  7.166.21-22h 
स शरैराचितस्तेन राक्षसो रणमूर्धनि॥ २१॥
व्यकाशत महाराज श्वाविच्छललतो यथा।
 
 
अनुवाद
महाराज! अश्वत्थामा के बाणों से बिंधकर वह राक्षस काँटों से भरे साही के समान शोभा पा रहा था।
 
Maharaj! That demon pierced by those arrows of Ashvatthama was looking as beautiful as a porcupine full of thorns. 21 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)